भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए का निरस्तीकरणः एक विश्लेषणात्मक अध्ययन
Bibliographic Data
| ID | 22196872 |
|---|---|
| Authors | Sweety Sweety (Maharshi Dayanand University), Pradeep Kumar (0000-0002-5717-4242, Maharshi Dayanand University), Pradeep Kumar Pradeep Kumar |
| Year | 2023 |
| Volume | 4 |
| Issue | 2 |
| Publication date | 2023-12-31 |
| Peer Reviewed | Yes |
| Open Access | Yes |
| Type | ARTICLE |
| Venue | ShodhKosh: Journal of Visual and Performing Arts (JOURNAL) |
| Journal identifiers | ISSN: 2582-7472 • E-ISSN: 2582-7472 |
| Publisher | Granthaalayah Publications and Printers (PUBLISHER • IN) |
| DOI | 10.29121/shodhkosh.v4.i2.2023.4055 |
| OpenAlex | W4407182698 |
भारतीय संविधान किसी भी राष्ट्र द्वारा निर्मित कुशल (श्रेष्ठ) संविधानों में से एक है। यह विभिन्न संविधानों का मिश्रण है। भारतीय संविधान निर्माताओं ने भारतीय उपमहाद्वीप की विविधताओं को ध्यान में रखते हुए संविधान का मसौदा तैयार करते समय अत्यंत विवेकपूर्ण तरीके से कार्य किया है। भारतीय संघ का प्रत्येक राज्य अपनी अद्वितीयता और विविधता लिए हुए है। भारत के उत्तरी छोर पर जम्मू-कश्मीर अपनी विविधता के लिए प्रसिद्ध है। जम्मू-कश्मीर एक मात्र ऐसा राज्य है जिसने भारतीय संघ में प्रवेश तात्कालिक परिस्थितियों के आधार पर कुछ शर्तों के माध्यम से हुआ है। जिसका आधार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 को बनाया गया था। अनुच्छेद 370 और 35ए भारतीय संविधान के दो मुख्य प्रावधान हे जो जम्मू और कश्मीर राज्य को कुछ विशेष प्रावधान प्रदान करते थे। अनुच्छेद 370 अस्थाई प्रावधान तथा अनुच्छेद 35ए संविधान संशोधन की अपूर्ण प्रक्रिया से केवल राष्ट्रपति आदेश से लागू किया गया था। भारतीय राज्यों की एकीकरण की प्रक्रिया के तहत जम्मू कश्मीर राज्यो को अपना संविधान अलग झण्डा बनाने का अधिकार दिया गया था। जबकि अनुच्छेद 35ए राज्य के स्थानीय निवासियो को कुछ विशेषाधिकार प्रदान करता था। अगस्त 2019 को भारत सरकार द्वारा इस अस्थाई प्रावधान को निरस्त कर दिया गया।इस शोध पत्र में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 और 35ए का विश्लेषणात्मक अध्ययन करना तथा निरस्त करने की प्रक्रिया वैधता का अध्ययन करना तथा साथ ही इस प्रक्रिया पर ध्यान केन्द्रित करना कि ऐतिहासिक घटनाक्रमों में इन प्रावधानों के कानूनी परिप्रेक्ष्य के साथ-साथ वह प्रक्रिया जिसके कारण इन प्रावधानों को निरस्त किया गया और साथ ही निरस्तीकरण की संवैधानिकता का अध्ययन तथा इसके बाद होने वाले प्रभावों का अध्ययन प्रस्तुत करना है
Legal and Regulatory Analysis · Linguistic, Cultural, and Literary Studies · Military Technology and Strategies · Psychology
| Citation velocity | historical |
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| Highly cited | No |